शहजहा का उर्स मनाया गया, भारी भीड जुटी

आगरा, मुगल बादशाह शाहजहां के उर्स का तीन दिवसीय कार्यक्रम जोश और जज्‍बात के माहौल के साथ परंपरागत ठेठ ताजगंज के अंदाज में संपन्‍न हुआ। मुस्लिम परंपराओं का पालन करते हुए बडी संख्‍या में अन्‍य समुदाय के लोगों ने भी मुगल बादशाह को अपनी श्रद्धांजली दी।

28 से 30 जून के बीच ताजमहल में प्रवेश टिकट न लगाये जाने से पांच लाख से अधिक के द्वारा इन नायब मौके पर इमारत के परिसर में प्रवेश किया गया। दिल्‍ली और अजमेर से भी बडी संख्‍या में एसे व्‍यक्तियों का आगमन हुआ जो कि अपने को किसी न किसी रूप में पुराने मुगल साम्रराज्‍य से जुडा बताते है। हैदराबाद से आये प्रिंस तूसी उर्स के दौरान खास आकर्षण रहे। अपने को अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाहजफर को वारिस बताने वाले प्रिंस के द्वारा इस अवसर पर आयोजित पत्रकार वार्ता में अंतिम मुलबादशाह के द्वारा लडी गयी जंग की याद करवाते हुए भारत सरकार से मांग की कि बहादुर शाह को भी अन्‍य विशिष्‍ट योगदान देने वाले भारतीयों के समान ही भारत रत्‍न की उपाधि से सम्‍मानित किया जाये।