दशकों के चलन के बाद चबन्‍नी अब बन्‍द


आगरा, भारतीय धातुमुद्राओं में से पिछले एक दशक में नये पैसे अघोषित रूप से बाहर होते गये लोगों पर कोई खास असर नहीं पडा किंतु 30 जून को जब चवन्‍नी का चलन बन्‍द किया गया तो कई को दर्द महसूस हुआ। सामान्‍यत: जब सिक्‍का बन्‍द होता है तो उसे बैंक से बदलने पहुचते हैं किंतु चवन्‍नी के मामले में ऐसा नहीं हुआ।

बैंक पहुंच बदलने के स्‍थान पर अपने पास याद के रूप में सुरक्षित रखा

प्रतीकात्‍मक रूप से भी बैंकों चवन्‍नी बदलने आये किसी ग्राहक की सेवा करपे का कोई मौका नहीं मिला।

जिनपर भी कुछ सिक्‍के थे उन्‍हों ने भावी पीढी और उससे जुडी मीठी यादों के लिए सुरक्षित रख लिया। पिछले पांच साल में दामों में उछाल का जो दौर रहा है दसके कारण चवन्‍नी ही क्‍या आठ आने भी मौद्रिक आदान प्रदान में अपनी उपयोगिता खो चुके हैं। बाजार के नये चलन के अनुसार लघु खरीदारी वाले बाजारों में अब एक रुपया न्‍यून राशि का स्‍थान ले चुका है, वहीं बडे आदान प्रदानों में दस रुपए या उससे कम की राशि महत्‍वहीन हो चुकी है।